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सोमवार, 17 अक्टूबर 2011

छेड़खानी की तो घड़ी देगी जोर का झटका

कु शानू : दिल्ली जैसे महानगरों में आजकल महिलाओं से छेड़खानी और शराब पीकर गाड़ी चलाने की घटनाएं बढ़ रही हैं। इन वजहों से शहरों का माहौल दिन-प्रतिदिन खराब हो रहा है। लेकिन स्कूली छात्र-छात्राओं ने इन समस्याओं का समाधान अपने तरीके से तलाशा है।


दिल्ली की एक छात्रा ने ऐसी घड़ी तैयार की है जो जबरन हाथ खींचने पर करंट मारेगी। उत्तर प्रदेश के छात्र ने ऐसा सेंसर विकसित किया है जो ड्राइवर के मुंह से शराब की गंध आने पर स्टेयरिंग जाम कर देगा। नेशनल इनोवेशन फाउंडेशन (एनआईएफ) ने ऐसे अनोखे आविष्कार करने वाले 26 छात्रों को इग्नाइट पुरस्कारों के लिए चुना है। इन बच्चों को पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम आईआईएम अहमदाबाद में एक समारोह में पुरस्कार प्रदान करेंगे।
एनआईएफ के निदेशक एवं आईआईएम, अहमदाबाद के प्रोफेसर अनिल के. गुप्ता ने बताया कि दिल्ली के जी.डी. गोयनका स्कूल की इंटरमीडिएट की छात्र मनु चोपड़ा ने छेड़छाड़ रोधी घड़ी का खाका पेश किया है। घड़ी बैटरी से चलेगी तथा इसमें सेंसर लगे होंगे। यदि कोई लड़की की कलाई जबरन खींचे तो घड़ी उसे जोर का झटका देगी। लेकिन लड़की के खुद के हाथ लगाने पर घड़ी से करंट नहीं लगेगा।
महिलाओं को घर से निकलते समय इसे ऑन करके चलना होगा। ऐसा इसमें लगे सेंसर की वजह से होगा। सेंसर एक तो इस बात को संज्ञान में लेगा कि हाथ जबरदस्ती खींचा जा रहा है। दूसरे, इस दौरान छेड़खानी की शिकार हो रही लड़की के दिल की धड़कने बढ़ेंगी, उन्हें भी घड़ी में लगे सेंटर रीड करेंगे।

रविवार, 16 अक्टूबर 2011

क्या विज्ञान से संबंधित विषयों में यदि आपकी रुचि है...

कु शानू : क्या विज्ञान से संबंधित विषयों में यदि आपकी रुचि है, तो कई वेबसाइट्स भी आपके ज्ञान को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

आप विज्ञान के विभिन्न पहलुओं से अवगत होना चाहते हैं, तो ऑनलाइन माध्यम से भी अपनी जिज्ञासाओं को शांत कर सकते हैं। इंटरनेट पर कई ऐसी वेबसाइट्स हैं, जहां विज्ञान की विभिन्न शाखाओं से जुड़ी हुई नवीनतम जानकारी से आप रूबरू हो सकते हैं।


ऐसी ही एक वेबसाइट है www.sciencedaily.com जिस पर आपको विज्ञान और तकनीक, सेहत, पर्यावरण आदि से जुड़ी तमाम न्यूज पढ़ने को मिल जाती हैं। यह वेबसाइट विज्ञान जगत की विभिन्न नई और रोचक जानकारियों से युक्त है।


जैसे, अर्थ साइंस एनवॉयरमेंटल साइंस, नेचुरल डिजास्टर जैसे विषयों पर लेटेस्ट न्यूज पढ़ने के लिए आप अर्थ एंड क्लाइमेट ऑप्शन को क्लिक कर सकते हैं। बायोलॉजी, बायोकेमिस्ट्री, बायोटेक्नोलॉजी आदि से संबंधित कई महत्वपूर्ण जानकारियां आपको यहां मिल जाएंगी।
शानू जैसवाल 
यदि आप विज्ञान की बारीकियों से अवगत होना चाहते हैं तो विज्ञान से संबंधित वेबसाइट www.wonderwhizkids.com पर क्लिक करें। इस साइट पर स्टूडेंट्स, टीचर्स और पेरेंट्स सबके जरूरत की सामग्री उपलब्ध है। होमपेज पर फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी के अलग-अलग लिंक हैं। आप जिस टॉपिक के बारे में जानकारी चाहते हैं, उसे क्लिक कर सकते हैं। विज्ञान के अंतर्गत प्रोजेक्ट का विशेष महत्व होता है। इस साइट पर साइंस प्रोजेक्ट्स की भी जानकारी उपलब्ध है।


विज्ञान से संबंधित वेबसाइट्स में www.nature.com का अपना खास महत्व है। नेचर काफी प्रतिष्ठित साइंस पत्रिका मानी जाती है। इस वेबसाइट पर आपको विज्ञान से संबंधित विभिन्न नवीनतक रिसर्च, न्यूज, बुक्स आदि की संपूर्ण जानकारी मिल जाएगी। आप चाहें तो इस वेबसाइट पर अपना अकाउंट भी खोल सकते हैं। इसके अलावा यदि आपकी रुचि इंटरनेट पर विज्ञान से संबंधित नवीनतम आर्टिकल्स पढ़ने की हो, तो आप www.esciencenews.com पर विजिट कर सकते हैं।



शनिवार, 15 अक्टूबर 2011

बंद होगी गूगल बज की सेवाएं

कु.शानू । गूगल ने शुक्रवार को अपनी विवादास्पद सोशल नेटवर्किग सेवा गूगल बज व कई अन्य सेवाओं को आने वाले सप्ताहों में बंद करने की घोषणा की।
शानू 
गूगल ने अपने आधिकारिक ब्लॉग पर अपने कोड सर्च इंजन, बज, यूजर को दोस्तों के अपडेट देने वाली जैकू सेवा, आईगूगल व गूगल सर्च के लिए यूनीवर्सिटी रिसर्च प्रोग्राम बंद करने की घोषणा की।
गूगल ने सितंबर की शुरुआत में ही अपनी कुछ सेवाएं बंद करने की घोषणा की थी। कंपनी ने कहा था कि वह अपनी कुछ सेवाएं बंद कर देगी तो कुछ को अन्य मौजूदा सेवाओं के साथ संयुक्त कर देगी। गूगल ने अपने ब्लॉग पर लिखा कि बदलती दुनियां में हमें भविष्य पर ध्यान देना है और भूत के प्रति ईमानदारी बरतनी है। हमने बज जैसे उत्पादों से बहुत कुछ सीखा है और उस सीख का हम हर दिन हमारे गूगल प्लस जैसे उत्पादों के प्रति अपने दृष्टिकोण में इस्तेमाल कर रहे हैं। हमारे उपभोक्ता हमसे बहुत बेहतरीन उत्पादों की उम्मीदें रखते हैं। आज की घोषणा हमें उपभोक्ताओं के लिए कुछ अद्भुत पेश करने की ओर केंद्रित करती है।
जीमेल सेवा से जुड़ी सोशल नेटवर्किग व मैसेजिंग सेवा गूगल बज की उपभोक्ता की निजता को लेकर काफी आलोचना हुई थी। जिसके चलते गूगल को अपनी इस सेवा को वापस लेना पड़ा। कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी लैरी पेज ने गुरुवार को कहा कि बज के बाद गूगल ने जून में गूगल प्लस सेवा पेश की थी। इस सेवा को अच्छी प्रतिक्रिया मिल रही है और इसके चार करोड़ से ज्यादा उपभोक्ता हैं।

गुरुवार, 13 अक्टूबर 2011

कबाल मेमन उर्फ इकबाल मिर्ची से पूछताछ शुरू

शानू : भारत के सबसे वांछित अपराधी दाऊद इब्राहिम का करीबी सहयोगी और १९९३ के मुंबई बम धमाके के आरोपी इकबाल मेमन उर्फ इकबाल मिर्ची से बुधवार को लंदन की पुलिस स्कॉटलैंड यार्ड ने पूछताछ की। दूसरी ओर भारत ने कहा है कि मिब्रिटेन में मिर्ची से पूछताछ प्रत्यर्पण की प्रक्रिया शुरूर्ची के भारत प्रत्यर्पण की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। दाऊद के ६१ वर्षीय सहयोगी मेमन की मुंबई पुलिस को ड्रग और १९९३ के मुंबई बम धमाकों के मामलों में तलाश है।


उसे मंगलवार को एसेक्स के रॉमफोर्ड में गिरफ्तार किया गया है। स्कॉटलैंड यार्ड ने बताया है कि एसेक्स में मिर्ची को एक व्यक्ति को जान से मारने की धमकी देने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। उससे पूर्वी लंदन के पुलिस स्टेशन में पूछताछ की जा रही है। उधर नई दिल्ली में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने बताया कि मिर्ची के प्रत्यर्पण के लिए प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। प्रवक्ता ने बताया कि उसके खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी है जो कि अब भी वैध है। इसका अर्थ यह है कि वह एक वांछित व्यक्ति है और हम उसके भारत प्रत्यर्पण की मांग कर सकते हैं।


मिर्ची को १९९५ में ड्रग की सप्लाई और मुंबई बम धमाकों के आरोप में स्कॉटलैंड यार्ड ने गिरफ्तार किया था।

बुधवार, 9 मार्च 2011

रोचक जानकारी


मिलनसार बनिए, ज्यादा समय तक जीवित रहेंगे आप



Story Update : शानू जैसवाल 
क्या आपको पता है कि अंर्तमुखी व्यक्ति की अपेक्षा मिलनसार व्यक्ति ज्यादा समय तक जीवित रहता है? यह बात आपको सुनने में भले ही अटपटी लगे लेकिन एक अध्ययन में यह साफ हुआ है। दोस्त और परिवार हर व्यक्ति की जिंदगी को आसान बना देते हैं। लेकिन आपको क्या मालूम है कि उनकी बदौलत आप तन्हा जीने वालों की तुलना में तीन साल तक ज्यादा जी सकते हैं।


3.7 साल ज्यादा जीते है मिलनसार लोग
ब्रिघम यंग विश्वविद्यालय और नॉर्थ कैरोलिना के एक सर्वे में पाया गया कि दोस्तों, परिवार और समुदाय के साथ जिंदगी बिताने वालों की तुलना में अकेले जीने वालों को मौत की आशंका 50 फीसदी तक अधिक होती है। रिपोर्ट के मुताबिक, सामाजिक रूप से मिलनसार लोग औसतन 3.7 साल ज्यादा जीते हैं। शोधकर्ताओं ने पाया कि दोस्त होने की तुलना सिगरेट छोड़ने के फायदे तक से की जा सकती है।

दोस्त जीवन को आसान बनाते हैं
अध्ययन में बताया गया कि सामाजिक तौर से अलग-थलग जीने वाले लोगों में शराबियों की तरह मरने की आशंका ज्यादा होती है। यह आशंका मोटापे के शिकार लोगों और शारीरिक तौर पर निष्क्रिय लोगों से ज्यादा होती है। अध्ययन को अंजाम देने वाले मनोविज्ञान के प्रोफेसर बेर्ट उचीनो ने बताया कि दोस्त और शुभचिंतक जीवन को आसान बनाते हैं। उन्होंने कहा कि वे भले ही आपको अप्रत्यक्ष तौर पर सहायता करें लेकिन वे आपमें यह अहसास जगाते हैं कि आपको जीना है।

आवाज से पता चलेगा, कितना बेवफा है आपका जीवन साथी



क्या किसी की आवाज से उसकी वफादारी का अंदाजा लगाया जा सकता है। एवोलूशनेरी साइक्लॉजी जर्नल में प्रकाशित एक शोध में इस संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी दी गई है। शोध के अनुसार महिलाएं मानती हैं कि अगर उनका जीवन साथी धीमी आवाज में बात करता है तो वह धोखेबाज हो सकता है। इसके विपरीत पुरुष सोचते हैं कि अधिक ऊंची आवाज में बात करने वाली महिलाएं विश्वासपात्र नहीं होती। किसी इंसान की आवाज और उसकी विश्वसनीयता के बीच संबंध बताने वाली यह पहली रिसर्च है।

जीवन पर पड़ता है बेवफाई का नकारात्मक प्रभाव
शोध में शामिल मैकमास्टर यूनिवर्सिटी की ग्रेजुएट स्टूडेंट जिलियन ओकॉनर ने बताया कि पुरुष और महिलाएं अपना जीवन साथी चुनते समय आवाज के स्तर की भविष्य की विश्वसनीयता के रूप में जांच करते हैं। अध्ययन में पाया गया कि ऊंची आवाज में बात करने वाली महिलाएं और धीमी आवाज में बात करने वाले पुरुष एक-दूसरे को अपने प्रति विश्वसनीय नहीं मानते। अगर पति-पत्नि एक दूसरे के प्रति वफादार नहीं हैं तो इससे भावनात्मक, आर्थिक और पारिवारिक रूप से नकारात्मक परिणाम सामने आते हैं। लेकिन इस नई रिसर्च से सफल जीवन के लिए एक विश्वासपात्र जीवन साथी चुनने में काफी मदद मिलेगी। 

तेज बोलने वाली महिलाएं बेवफा
रिसर्च में शामिल किए गए प्रतिभागियों को पुरुष और महिला की आवाज के रिकॉर्ड किए गए दो अलग-अलग क्लिप दिखाए गए। इन दोनों आवाजों को इलेक्ट्रॉनिक तरीके से धीमी और तेज आवाज में परिवर्तित किया गया था। प्रतिभागियों को धीमी और तेज आवाज दोनों क्लिप दिखाए गए। क्लिप दिखाने के बाद प्रतिभागियों से पूछा गया कि प्रत्येक जोड़े में से कौन-सा एक इंसान उन्हें जीवन साथी के रूप में धोखा दे सकता है। प्रतिभागियों में पुरुषों ने ऊंची आवाज में बात करने वाली महिला और महिलाओं ने धीमी आवाज में बात करने वाले पुरुष को गैर-वफादार बताया। 

हार्मोंस जुड़ा है बेवफाई और आवाज के स्तर से
मैकमास्टर यूनिवर्सिटी में असिस्टेंट प्रोफेसर डेविड फेनबर्ग ने बताया कि आवाज के स्तर, हार्मोंस और अविश्वसनीयता में एक विशेष संबंध है। जिन पुरुषों में टेस्टास्टरोन का स्तर अधिक होता है, उनमें आवाज का स्तर कम होता है। इसी तरह जिन महिलाओं में एस्ट्रोजेन का स्तर अधिक होता है, उनमें आवाज का स्तर अधिक होता है। इन हार्मोंस का उच्च स्तर धोखेबाजी के व्यवहार से जुड़ा हुआ है। अध्ययन के आधार पर शोधकर्ताओं ने विश्वास जताया कि इस रिसर्च से किसी इंसान को जीवन साथी चुनने में काफी मदद मिलेगी।

सावधान! वजन बढ़ने से पागलपन का बढ़ता है खतरा



यदि आपका वजन बढ़ रहा है, तो इसे हल्के में न लें, क्योंकि इसके कारण आप पागलपन के शिकार हो सकते हैं। ऑस्ट्रेलियन नेशनल यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं द्वारा किए गए एक शोध में यह बात सामने आई है कि वजन बढ़ने के साथ-साथ पागलपन का भी खतरा बढ़ जाता है। ऑस्ट्रेलिया आधारित शोध के प्रमुख शोधकर्ता प्रोफेसर कारीन एंस्टे ने बताया कि वर्तमान समय में पागलपन और मोटापा ऑस्ट्रेलियाई नागरिकों के लिए दो बड़ी शारीरिक समस्याएं हैं।

अल्जाइमर रोग का भी खतरा
प्रमुख शोधकर्ता कारीन एंस्टे ने बताया कि 40 से 60 वर्ष के बीच की अवस्था में कम वजन, अधिक वजन और मोटापा वृद्घावस्था (60 वर्ष से ऊपर) में पागलपन के खतरे को जन्म देता है। एंस्टे ने बताया कि शोध के दौरान उन्होंने 25,000 से अधिक लोगों में देखा कि उनके शरीर का असमान वजन पागलपन का जनक है। उन्होंने बताया कि शोध में पता चला कि पागलपन का सर्वाधिक खतरा अधिक बॉडी मास इंडेक्स वाले लोगों को होता है। इतना ही नहीं, शोध में पता चला कि मध्य जीवन में अधिक वजन के कारण अल्जाइमर रोग का खतरा भी अधिक रहता है।

मोटे लोगों के लिए खतरा और अधिक
एंस्टे ने बताया कि यह खतरा उन लोगों के लिए और बढ़ जाता है, जो धीरे-धीरे मोटापा के शिकार हो जाते हैं। एंस्टे ने बताया कि मोटापा एक गंभीर बीमारी है। इसका कम समय के लिए प्रभाव नहीं पड़ता, बल्कि शरीर पर इसका दीर्घकालिक प्रभाव पड़ता है। मोटापा के कारण बुढ़ापा भी जल्दी आ जाता है। उन्होंने बताया कि इस शोध में इस बात के स्पष्ट साक्ष्य मिले कि जीवन की मध्य अवस्था में मोटापा या अधिक वजन बाद की उम्र में पागलपन को जन्म देता हे।

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